mausam to badalte hain lekin kya garm hawa kya sard hawa | मौसम तो बदलते हैं लेकिन क्या गर्म हवा क्या सर्द हवा

  - Qaisar Shameem
मौसमतोबदलतेहैंलेकिनक्यागर्महवाक्यासर्दहवा
दोस्तहमारेआँगनमेंरहतीहैहमेशाज़र्दहवा
सबअपनेशनासाछोड़गएरस्तेमेंहमेंग़ैरोंकीतरह
चेहरेपेहमारेडालगईलाकरयेकहाँकीगर्दहवा
छूटेकभीफूलोंकानगरकोशिशतोयहीहैअपनीमगर
इकरोज़उड़ालेजाएगीपत्तोंकीतरहबे-दर्दहवा
क्याबातहुईक्यूँँशहरजलाअबइसकेसिवाकुछयादनहीं
इकफ़र्दसरापाआगहुआपल-भरमेंहुआइकफ़र्दहवा
आईहैघनेजंगलमेंअभीजोखेलभीचाहेखेलेमगर
कलमेरेसाथउड़ाएगीफिरसहरासहरागर्दहवा
आँखोंकीचमकमौहूमहुईलौदेतेबदनअफ़्सुर्दाहुए
दरआईहै'क़ैसर'घरमेंमिरेयेकैसीरुतोंकीसर्दहवा
  - Qaisar Shameem
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