jab dard ki shamaein jaltee hain ehsaas ke naazuk seene men | जब दर्द की शमएँ जलती हैं एहसास के नाज़ुक सीने में

  - Qaisar Qalandar
जबदर्दकीशमएँजलतीहैंएहसासकेनाज़ुकसीनेमें
इकहुस्नसाशामिलहोताहैफिरतन्हातन्हाजीनेमें
कुछलुत्फ़कीगर्मीकीख़ातिरकुछजान-ए-वफ़ाकेसदक़ेमें
गेसू-ए-अलमकेसाएमेंराहतसीमिलीहैपीनेमें
आग़ोश-ए-तमन्नाछूआएँजबज़ुल्फ़-ए-यारकीख़ुश्बूमें
आँखोंमेंसावनलहरायादीपकसासुलगासीनेमें
मौसीक़ी-ए-हुस्नकीमौजेंथीकुछआँखोंमेंकुछप्यालोंमें
जोसाहिल-ए-दिलतकहोआएँयादोंकेएकसफ़ीनेमें
पलकोंमेंसुलगतेतारोंसेमैंरातकीअफ़्शाँचुनसका
शोलोंकोछुपाएफिरताहूँमैंदिलकेएकनगीनेमें
वोरंग-ए-हयाएहसास-ए-तरबआईना-ए-रुख़केअक्स-फ़गन
इकताबिशतेरेचेहरेकीइकआँचसीमेरेसीनेमें
कलियोंनेघूँघटसरकाएशबनमनेमोतीरोलदिए
लज़्ज़तसीमिलीहैअश्कोंसेयेचाकजिगरकासीनेमें
नग़्मोंकीचाँदनीछिटकीहैशे'रोंकेशबिस्ताँमहकेहैं
फिरसाज़-ए-ग़ज़ललेआयाहूँइकलुत्फ़हैअक्सरजीनेमें
  - Qaisar Qalandar
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