ai hum-nafso dard ki ye raat kaddi hai | ऐ हम-नफ़सो दर्द की ये रात कड़ी है

  - Qaisar Qalandar
हम-नफ़सोदर्दकीयेरातकड़ीहै
सरथा
मेंहुएदिलमेंकहींआसखड़ीहै
हम-रंग-ए-शफ़क़हैदिल-ए-मासूमकाआलम
वोदौर-ए-तमन्नाकीसहरचुपकेखड़ीहै
उजलीथीतिरीयादकीयेज़र्दसीपत्ती
ख़ाकिस्तर-ए-अय्याममेंख़ामोशपड़ीहै
उनआँखोंमेंफिरदेखाहयारंग-ए-तबस्सुम
रस्तेमेंक़ज़ासेमिरीफिरआँखलड़ीहै
फिरदस्त-ए-सबानेवोगजरआजबजाया
पलकोंपेफिरइकबारमिरीनींदउड़ीहै
फिरशहर-ए-ग़ज़ालाँमेंग़ज़ललायाहै'क़ैसर'
सूरत-कदा-ए-हुस्नमेंफिरधूमपड़ीहै
  - Qaisar Qalandar
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