tujh se bichhad ke dard tira hum-safar raha | तुझ से बिछड़ के दर्द तिरा हम-सफ़र रहा

  - Qaisar Qalandar
तुझसेबिछड़केदर्दतिराहम-सफ़ररहा
मैंराह-ए-आरज़ूमेंअकेलाकभीथा
येऔरबातरातजवाँथीजवाँरही
साक़ीउदासियोंकेमुझेजामदेगया
बाज़ार-ए-वक़्तसेकहाँजिंस-ए-वफ़ागई
तन्हाहैमाह-ए-मिस्रकाजलताहुआदिया
तारीकथीयेरातमगरयादकीकिरन
आईतोनूर-ए-हुस्नकादरवाज़ाफिरखुला
हाइलहुएदिलोंपेयेअनजानेफ़ासले
पहलेहमारेदरमियाँकुइफ़ासलाथा
हाथोंमेंरातआसकीशमएँलिएहुए
तारीकियोंमेंतुझकोपुकाराहैबारहा
जन्नत-ए-ख़यालनिगाह-ए-फ़ुसूँ-शिआर
'क़ैसर'कोअपनेगेसुओंमेंआजफिरछुपा
  - Qaisar Qalandar
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