tiri nazar ke ishaaron ko dil-kashi bakshi | तिरी नज़र के इशारों को दिल-कशी बख़्शी

  - Qaisar Nizami
तिरीनज़रकेइशारोंकोदिल-कशीबख़्शी
नज़र-नवाज़नज़ारोंकोताज़गीबख़्शी
ख़िज़ाँकीज़दमेंहीअबतकतिरागुलिस्ताँथा
हमींनेकेबहारोंकोज़िंदगीबख़्शी
चमनकोहमनेहीअपनेलहूसेसींचाहै
कलीकोहमनेहीइकतर्ज़-ए-दिल-कशीबख़्शी
तिरीअदाभीअदाहैवोइकक़यामतकी
येऔरबातहैतारोंकोदिल-कशीबख़्शी
हैज़ोमचाक-ए-गिरेबाँकोअपनीक़िस्मतपर
कितुमनेक्यूँँमजाल-ए-रफ़ू-गरीबख़्शी
सुनादोअहल-ए-वफ़ाकोयेफ़ल्सफ़ा'क़ैसर'
जुनूँनेहोशकीदुनियाकोआगहीबख़्शी
  - Qaisar Nizami
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