aalam-e-imkaan men duniya ki hawa thii main na tha | आलम-ए-इम्काँ में दुनिया की हवा थी मैं न था

  - Qaisar Nizami
आलम-ए-इम्काँमेंदुनियाकीहवाथीमैंथा
जल्वा-आरासिर्फ़ज़ात-ए-किब्रियाथीमैंथा
करदियाबेदारजिसनेसाकिनान-ए-अर्शको
वोकिसीदर्द-आश्नादिलकीसदाथीमैंथा
मुंतशिरजिसनेकियाथाउनकीज़ुल्फ़-ए-नाज़को
सचअगरपूछोतोवोबाद-ए-सबाथीमैंथा
खुलगयाजोराज़-ए-उल्फ़तआजअहल-ए-बज़्मपर
येतुम्हारीमस्तनज़रोंकीख़ताथीमैंथा
तंगकरगर्दिश-ए-अय्यामसेबहर-ए-सुजूद
वोतोमेरीज़िंदगीवक़्फ़-ए-दुआथीमैंथा
हदसेजब'क़ैसर'बढ़ीउनकीजफ़ा-ए-ना-रवा
जोब-रू-ए-कारआईवोवफ़ाथीमैंथा
  - Qaisar Nizami
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