mohabbat bais-e-deewangi hai aur bas main hooñ | मोहब्बत बाइस-ए-दीवानगी है और बस मैं हूँ

  - Qaisar Nizami
मोहब्बतबाइस-ए-दीवानगीहैऔरबसमैंहूँ
किअबपैहमइनायतआपकीहैऔरबसमैंहूँ
सुकूँहासिलहैदिनमेंऔरशबकोचैनमिलताहै
किअबतोकशमकशमेंज़िंदगीहैऔरबसमैंहूँ
जानेमाजराक्याहैनज़रकुछभीनहींआता
किअबहद्द-ए-नज़रतकतीरगीहैऔरबसमैंहूँ
नहींहैआजमुझकोख़दशा-ए-ज़ुल्मतज़मानेमें
रुख़-ए-ताबाँकीउनकेरौशनीहैऔरबसमैंहूँ
क़दमक्याडगमगाएँगेरह-ए-उल्फ़तमेंसाक़ी
बहुतहीमुख़्तसरसीबे-ख़ुदीहैऔरबसमैंहूँ
तिरेनक़्श-ए-क़दमपरसरझुकानाकामहैअपना
ख़ुदाशाहिदयेमेरीबंदगीहैऔरबसमैंहूँ
उन्हेंरूदाद-ए-ग़मअपनीसुनाऊँकिसतरह'क़ैसर'
वहीउनकीअदा-ए-बरहमीहैऔरबसमैंहूँ
  - Qaisar Nizami
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy