teraa firaq arsa-e-mahshar laga mujhe | तेरा फ़िराक़ अर्सा-ए-महशर लगा मुझे

  - Qadir Siddiqi
तेराफ़िराक़अर्सा-ए-महशरलगामुझे
जबभीख़यालआयाबड़ाडरलगामुझे
जबभीकियाइरादा-ए-तर्क-ए-तअल्लुक़ात
क्याजानेक्यूँवोशोख़हसीं-तरलगामुझे
परखातोज़ुल्मतोंकेसिवाऔरकुछथा
देखातोएकनूरकापैकरलगामुझे
ख़ुदअपनीज़ातपरभीरहजाएए'तिबार
वक़्तहोसकेतोवोनश्तरलगामुझे
क्याजानेकिसजहानमेंबस्तेहैंनर्म-दिल
मैंनेजिसेछुआवहीपत्थरलगामुझे
इकमर्तबाज़रूरनज़रफिरसेउठगई
जोक़दभीतेरेक़दकेबराबरलगामुझे
क़िस्मतइसीकोकहतेहैंफूलोंकीसेजपर
लेटाजोमैंतोकाँटोंकाबिस्तरलगामुझे
उसफूलकाकलेजामिलाग़मसेपाशपाश
जोफूलदेखनेमेंगुल-ए-तरलगामुझे
दिलहँसकेझेलजाएयेबातऔरहैमगर
चरकातिरीनिगाहकाअक्सरलगामुझे
दुनियाकायेनिज़ामयेमेआ'र-ए-सीम-ओ-ज़र
कमतरलगामुझेकभीबद-तरलगामुझे
उनकीगलीकीबातही'क़ादिर'अजीबहै
हरशख़्सशे'र-फ़हम-ओ-सुख़नवरलगामुझे
  - Qadir Siddiqi
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