aalam-e-soz-e-tamannaa be-karaan karte chalo | आलम-ए-सोज़-ए-तमन्ना बे-कराँ करते चलो

  - Qabil Ajmeri
आलम-ए-सोज़-ए-तमन्नाबे-कराँकरतेचलो
ज़र्रेज़र्रेकोशरीक-ए-कारवाँकरतेचलो
कितनेरौशनहैंवोआरिज़कितनेशीरींहैंवोलब
रास्ताकटजाएगाज़िक्र-ए-बुताँकरतेचलो
शाम-ए-ग़मकीज़ुल्मतेंहैंऔरसहरा-ए-हयात
दीदा-ए-बेदारकोअंजुम-फ़िशाँकरतेचलो
रास्तेमेंबुझजाएँआरज़ुओंकेचराग़
ज़िक्र-ए-मंज़िलकारवाँ-दर-कारवाँकरतेचलो
जानेकिसआलममेंआएँआनेवालेक़ाफ़िले
साया-ए-दीवार-ए-जानाँजावेदाँकरतेचलो
मज़हर-ए-तहज़ीबहैइकएकतार-ए-पैरहन
बसयूँँहीअंदाज़ा-ए-सूद-ओ-ज़ियाँकरतेचलो
  - Qabil Ajmeri
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