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pankaj pundir
yaar koi to usko samjhaao
yaar koi to usko samjhaao | यार कोई तो उसको समझाओ
- pankaj pundir
यार
कोई
तो
उसको
समझाओ
प्यार
की
नाव
पर
अना
का
बोझ
- pankaj pundir
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अगर
तुम्हारी
अना
ही
का
है
सवाल
तो
फिर
चलो
मैं
हाथ
बढ़ाता
हूँ
दोस्ती
के
लिए
Ahmad Faraz
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तू
मोहब्बत
नहीं
समझती
है
हम
भी
अपनी
अना
में
जलते
हैं
इस
दफा
बंदिशें
ज़ियादा
हैं
छोड़
अगले
जनम
में
मिलते
हैं
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Ritesh Rajwada
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लड़
सको
दुनिया
से
जज़्बों
में
वो
शिद्दत
चाहिए
इश्क़
करने
के
लिए
इतनी
तो
हिम्मत
चाहिए
कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
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Nadeem Shaad
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उधारी
सर
से
ऊपर
बढ़
चुकी
है
हमारी
जान
जोखिम
में
पड़ी
है
हमीं
अपमान
सहकर
जी
रहे
हैं
अना
की
लाश
पंखे
पर
मिली
है
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Vikas Sahaj
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कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
Nadeem Shaad
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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चादर
की
इज़्ज़त
करता
हूँ
और
पर्दे
को
मानता
हूँ
हर
पर्दा
पर्दा
नइँ
होता
इतना
मैं
भी
जानता
हूँ
Ali Zaryoun
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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बहुत
ग़ुरूर
है
दरिया
को
अपने
होने
पर
जो
मेरी
प्यास
से
उलझे
तो
धज्जियाँ
उड़
जाएँ
Rahat Indori
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पहले
राज़ी
था
आश्ना
मेरा
अब
किसी
बात
पर
नहीं
बनती
pankaj pundir
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जाने
क्या
बात
किस
ख़ता
का
बोझ
बढ़
गया
फिर
किसी
सज़ा
का
बोझ
मेहरबाँ
वो
बरस
गया
हम
पर
आख़िरश
कम
हुआ
ख़ुदा
का
बोझ
ख़ाक
रखती
है
जाने
किस
किस
की
बस
हवा
ही
नहीं
हवा
का
बोझ
यार
कोई
तो
उसको
समझाओ
प्यार
की
नाव
पर
अना
का
बोझ
ख़ामुशी
से
कहीं
ज़ियादा
है
लौट
आई
किसी
सदा
का
बोझ
राब्ता
ख़त्म
कर
लिया
उसने
सबके
बस
का
नहीं
वफ़ा
का
बोझ
ज़िंदगी
और
ज़िंदगी
का
दर्द
तुम
समझते
हो
क्या
क़ज़ा
का
बोझ
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pankaj pundir
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कहानी
में
फिर
वही
हुआ
आख़िर
जो
अच्छे
लड़कों
के
साथ
होता
है
pankaj pundir
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चर्ख़
मेरी
प्यास
से
वाक़िफ़
हुआ
धूप
ने
सहरा
पे
दरिया
लिख
दिया
pankaj pundir
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आ
गया
हमको
जौन
जैसा
फ़न
जिसको
मिलना
ज़रा
ख़फ़ा
करना
pankaj pundir
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