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Abuzar kamaal
kahii bhi kisi se sunoge
kahii bhi kisi se sunoge | कहीं भी किसी से सुनोगे
- Abuzar kamaal
कहीं
भी
किसी
से
सुनोगे
सुनोगे
लगाते
बुझाते
अगर
सच
बताना
बुरा
है
मुझे
तू
बुरा
ही
समझ
ले
शुरू
से
हमें
सच
पता
है
हवा
से
भरे
हैं
लिफ़ाफ़े
हक़ीक़त
है
क्या
सब
पता
है
बुरा
है
वही
बस
जो
कह
दे
बताना
उसी
को
जो
समझे
सुनाना
उसी
को
जो
सुन
ले
जो
पूछे
कहा
है
ये
किस
ने
ये
कहना
बताया
है
उस
ने
जियो
जिस
लिए
जी
रही
हो
भला
डर
रही
हो
तो
किस
से
कहो
किस
लिए
जी
रही
हो
अगर
मर
गई
हो
तो
किस
पे
- Abuzar kamaal
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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या'नी
तुम
वो
हो
वाक़ई
हद
है
मैं
तो
सच-मुच
सभी
को
भूल
गया
Jaun Elia
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अगर
सच
इतना
ज़ालिम
है
तो
हम
से
झूट
ही
बोलो
हमें
आता
है
पतझड़
के
दिनों
गुल-बार
हो
जाना
Ada Jafarey
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ठीक
थी
उन
सेे
मुलाक़ात
मगर
ठीक
ही
थी
फ़िल्म
इतनी
नहीं
अच्छी
कि
दोबारा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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दो
गज़
सही
मगर
ये
मेरी
मिल्कियत
तो
है
ऐ
मौत
तूने
मुझे
ज़मींदार
कर
दिया
Rahat Indori
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सच
कहें
तो
वो
कहानी
बीच
में
दम
तोड़
देगी
जिस
कहानी
को
सभी
किरदार
छोड़े
जा
रहे
हैं
Anurag Pandey
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ये
तुम
भी
जानते
हो
कि
हालात
नर्म
है
कहने
को
कह
रहा
हूँ
कि
सब
ठीक
ठाक
है
shaan manral
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हम
भी
तुमको
धोखा
दें
ये
ठीक
नहीं
आँख
के
बदले
आँख
कहाँ
तक
जायज़
है
Gaurav Singh
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हमको
हकीम
ने
ही
किया
ठीक
दोस्तों
हम
पर
किसी
के
लम्स
ने
जादू
नहीं
किया
Tanoj Dadhich
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ख़ुशरंग
नज़र
आता
है
जाज़िब
नहीं
लगता
माहौल
मेरे
दिल
से
मुख़ातिब
नहीं
लगता
मैं
भी
नहीं
हर
शे'र
में
मौजूद
ये
सच
है
ग़ालिब
भी
हर
इक
शे'र
में
ग़ालिब
नहीं
लगता
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Obaid Azam Azmi
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लगाता
हूँ
जब
तो
गैरों
से
दिल
लगाता
हूँ
मैं
नहीं
लगाता
तो
अपनो
को
मुँह
नहीं
लगाता
Abuzar kamaal
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किसके
ख़्वाबों
में
खो
गए
हैं
इन
हालातों
में
खो
गए
हैं
कोई
आए
तलाशे
उनको
मेरी
बातों
में
खो
गए
हैं
दिन
में
तुम्हें
मिलना
नईं
होता
और
अब
रातों
में
खो
गए
हैं
आँसू
समझ
के
निकाला
जिस
ने
उस
के
ही
चश्मों
में
खो
गए
हैं
दीपक
ढूंढ़ने
निकले
थे
जो
ख़ुद
ही
ताकों
में
खो
गए
हैं
इक
चेहरा
पढ़ने
आए
थे
हम
भी
किताबों
में
खो
गए
हैं
खट्टे
आम
तो
तोड़
लिए
है
मीठे
पेड़ों
में
खो
गए
हैं
सबको
दरिया
से
मिलना
है
सब
ही
लहरों
में
खो
गए
है
आप
कमाल
पे
ध्यान
लगाए
आप
तो
लफ़्ज़ों
में
खो
गए
हैं
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Abuzar kamaal
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नफरतें
मुझ
पर
असर
करती
नहीं
हैं,
जान
लो
मैंने
सीखा
है,
मोहब्बत
से
मोहब्बत
आएगी
Abuzar kamaal
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ख़ुदा
तेरा
मोहताज
हूँ
अपना
मोहताज
रखना
अता
कर
बुलंदी,
खु़दाई
की
भी
लाज
रखना
Abuzar kamaal
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बोलना
क्या
है
तुम्हें
चुप
ही
रहना
है
तुम्हें
फ़ाइदा
जब
कुछ
नहीं
फ़ाइदा
क्या
है
तुम्हें
लौट
आओ
एक
बार
आज़माना
है
तुम्हें
मेरी
मंगेतर
हो
तुम
मुझ
सेे
पर्दा
है
तुम्हें
सूट
ये
दर्ज़ी
मियाँ
जल्द
सीना
है
तुम्हें
जो
मुझे
था
कोयला
प्योर
सोना
है
तुम्हें
लिख
के
रख
लो
बात
ये
मेरा
होना
है
तुम्हें
हर
किसी
ने
प्यार
में
खेल
समझा
है
तुम्हें
सारी
ग़ज़लों
में
कमाल
जान
लिक्खा
है
तुम्हें
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Abuzar kamaal
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