baitha nadi ke paas yahii sochta raha | बैठा नदी के पास यही सोचता रहा

  - Pawan Kumar
बैठानदीकेपासयहीसोचतारहा
कैसेबुझाऊँप्यासयहीसोचतारहा
शादाबवादियोंमेंवोसूखाहुआदरख़्त
कितनाथाबेलिबासयहीसोचतारहा
कितनेलगेहैंघावमैंकरतारहाशुमार
कितनाहुआउदासयहीसोचतारहा
इसअंधीदौड़मेंकरेकिससिम्तअपनारुख़
हरफ़र्दबदहवासेयहीसोचतारहा
इज़हारेइश्क़जिसनेसरेआमकरदिया
वोपलथाकितनाख़ासयहीसोचतारहा
पत्थरकीतर्हपाँवहैंमेरेतोकिसलिए
चुभतीहैनर्मघासयहीसोचतारहा
उससेेतोमैंबिछड़गयाअबदेख'पवन'
कबदुनियाआएरासयहीसोचतारहा
  - Pawan Kumar
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