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Swapnil Tiwari
rona nahin mujhe mujhe rahne de bas udaas
rona nahin mujhe mujhe rahne de bas udaas | रोना नहीं मुझे मुझे रहने दे बस उदास
- Swapnil Tiwari
रोना
नहीं
मुझे
मुझे
रहने
दे
बस
उदास
तू
बैठ
मेरे
पास
मगर
यूँँ
लिपट
नहीं
- Swapnil Tiwari
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अज़ल
से
ले
कर
के
आज
तक
मैं
कभी
भी
तन्हा
नहीं
रहा
हूँ
कभी
थे
तुम
तो,
कभी
थी
दुनिया,
कभी
ये
ग़ज़लें,
कभी
उदासी
Ankit Maurya
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किसी
से
दूरी
बनाई
किसी
के
पास
रहे
हज़ार
कोशिशें
कर
लीं
मगर,
उदास
रहे
Sawan Shukla
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उदासी
जैसे
कि
उसके
बदन
का
हिस्सा
है
अधूरा
लगता
है
वो
शख़्स
अगर
उदास
न
हो
Vikram Sharma
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मेरी
बरसों
की
उदासी
का
सिला
कुछ
तो
मिले
उस
से
कह
दो
वो
मेरा
क़र्ज़
चुकाने
आए
Khalil Ur Rehman Qamar
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अब
इन
जले
हुए
जिस्मों
पे
ख़ुद
ही
साया
करो
तुम्हें
कहा
था
बता
कर
क़रीब
आया
करो
मैं
उसके
बाद
महिनों
उदास
रहता
हूँ
मज़ाक
में
भी
मुझे
हाथ
मत
लगाया
करो
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Tehzeeb Hafi
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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शहर
का
तब्दील
होना
शाद
रहना
और
उदास
रौनक़ें
जितनी
यहाँ
हैं
औरतों
के
दम
से
हैं
Muneer Niyazi
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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लम्हे
उदास
उदास
फ़ज़ाएं
घुटी
घुटी
दुनिया
अगर
यही
है
तो
दुनिया
से
बच
के
चल
Shakeel Badayuni
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परिंद
शाख़
पे
तन्हा
उदास
बैठा
है
उड़ान
भूल
गया
मुद्दतों
की
बंदिश
में
Khaleel Tanveer
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तुम्हारे
शह्र
में
मुझ
ऐसे
जंगली
के
लिए
दरख़्त
ही
नहीं
दिखते
हैं
ख़ुद-कुशी
के
लिए
मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
के
कल
से
वक़्त
निकालूंगा
ज़िन्दगी
के
लिए
वो
लम्हा
आ
ही
गया
इंतेज़ार
का
लम्हा
घड़ी
भी
बंद
है
पहले
से
इस
घड़ी
के
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Swapnil Tiwari
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ज़मीं
दुबारा
बने
और
ख़ुदा
का
नाम
न
हो
के
'कुन'
के
बाद
फिर
उस
से
दु'आ
सलाम
न
हो
भटकता
फिरता
हूँ
बेघर
जो
इन
दिनों
हर
शाम
ये
इक
उदास
परिंदे
का
इंतक़ाम
न
हो
ये
क्या
कि
एक
ज़रा
ख़ुद-कुशी
का
दिल
जो
करे
तो
घर
में
मौत
का
थोड़ा
भी
इंतेज़ाम
न
हो
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Swapnil Tiwari
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यूँं
मैं
दिल
का
ख़याल
रखता
हूँ
इस
में
तेरा
ख़याल
रखता
हूँ
तेरी
मर्ज़ी
का
भी
ख़याल
नहीं
तेरा
इतना
ख़याल
रखता
हूँ
और
मर
जाता
है
वही
बीमार
जिसका
अच्छा
ख़याल
रखता
हूँ
तुझ
को
फिर
भी
ख़राब
होना
है
फिर
भी
तेरा
ख़याल
रखता
हूँ
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Swapnil Tiwari
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ये
ज़िंदगी
जो
पुकारे
तो
शक
सा
होता
है
कहीं
अभी
तो
मुझे
ख़ुद-कुशी
नहीं
करनी
Swapnil Tiwari
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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