umr-bhar justuju rahegi kya | उम्र-भर जुस्तुजू रहेगी क्या

  - Parvez Sahir
उम्र-भरजुस्तुजूरहेगीक्या
आरज़ूआरज़ूरहेगीक्या
नहींहोनामुकालिमातुझसे
ख़ुदसेहीगुफ़्तुगूरहेगीक्या
रातरातसिर्फ़रातकीरात
मेरेपहलूमेंतूरहेगीक्या
शोर-ए-ख़ामोशीकमनहींहोना
रात-भरहाव-हूरहेगीक्या
तूजोमेरेगलेभीलगजाए
रूहसेरूहछूरहेगीक्या
ख़ुदकोकमरेसेगरनिकालदूँमैं
कोईशयफ़ालतूरहेगीक्या
यूँँभीतज़लीलकरकेऔरोंकी
ख़ुदतिरीआबरूरहेगीक्या
तोदोबारासहरनहींहोनी
तीरगीचार-सूरहेगीक्या
ऐसीरेतीलीज़मीनमें'साहिर'
मुझकोताब-ए-नुमूरहेगीक्या
  - Parvez Sahir
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