chashm-e-khush-aab ki tamsil nahin ho sakti | चश्म-ए-ख़ुश-आब की तमसील नहीं हो सकती

  - Parvez Sahir
चश्म-ए-ख़ुश-आबकीतमसीलनहींहोसकती
ऐसीशफ़्फ़ाफ़कोईझीलनहींहोसकती
मेरीफ़ितरतहीमेंशामिलहैमोहब्बतकरना
औरफ़ितरतकभीतब्दीलनहींहोसकती
उसकेदिलमेंमुझेइकजोतजगानापड़ेगी
ख़ुदहीरौशनकोईक़िंदीलनहींहोसकती
सिक्का-ए-दाग़ज़र-ए-ग़मसेभराहैमिरादिल
देखख़ालीमिरीज़म्बीलनहींहोसकती
इसलिएशिद्दत-ए-सदमातमेंरोदेताहूँ
मुझसेजज़्बातकीतश्कीलनहींहोसकती
दुखतोयेहै,वोमिरेदुखकोसमझताहीनहीं
उसतकएहसासकीतर्सीलनहींहोसकती
छोड़आयाहूँतिरादफ़्तर-ए-दरबार-नुमा
अबतिरेहुक्मकीतामीलनहींहोसकती
इसकसाफ़तकीलताफ़तसेभलाक्यानिस्बत?
तीरगीनूरमेंतहलीलनहींहोसकती
लाज़मीतोनहीं'साहिर'!वोमुझेमिलजाए
यानीहरख़्वाबकीतकमीलनहींहोसकती
  - Parvez Sahir
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