koi nazar na pad sake mujh haal-mast par | कोई नज़र न पड़ सके मुझ हाल-मस्त पर

  - Parvez Sahir
कोईनज़रपड़सकेमुझहाल-मस्तपर
बैठाहुआहूँइसलिएपिछलीनिशस्तपर
इकमौज-ए-आतिशींरग-ओ-पैमेंउतरगई
रखाहैउसनेजूँहीकफ़-ए-दस्त,दस्तपर
कबरासआईमुझकोमिरीफ़तहकीख़ुशी
मैंदिल-शिकस्ताहोगयाउसकीशिकस्तपर
हैयादमुझकोआजभीपहलामुकालिमा
क़ाइमहूँमैंतोआजभीअहद-ए-अलस्तपर
कैसेसँभालरक्खाहैइकज़ातनेउसे
शश्दरहूँकाएनातकेकुलबंद-ओ-बस्तपर
तयमरहलाकियाहैअदमसेवजूदका
पहुँचाहूँतबमैंमंज़िल-ए-ना-हस्त-ओ-हस्तपर
'साहिर'!मैंअपने-आपसेआगेनिकलगया
हैरत-ज़दाहैंसबमिरीरूहानीजस्तपर
  - Parvez Sahir
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