nairangi-e-khayaal pe hairat nahin hui | नैरंगी-ए-ख़याल पे हैरत नहीं हुई

  - Parvez Sahir
नैरंगी-ए-ख़यालपेहैरतनहींहुई
मुझकोकिसीकमालपेहैरतनहींहुई
मेरीतबाह-हालीकोभीदेखकरउसे
हैरतहैमेरेहालपेहैरतनहींहुई
पूछाथामैंनेजबउसेक्यामुझसेइश्क़है?
उसकोमिरेसवालपेहैरतनहींहुई
देखाजोएकउम्रकेब'अदउसनेआइना
ख़ुदअपनेख़द-ओ-ख़ालपेहैरतनहींहुई
इकउम्रसेमैंरफ़्ता-ए-रफ़्तार-ए-यारहूँ
मुझकोरम-ए-ग़ज़ालपेहैरतनहींहुई
आख़िरग़ुरूबहोनाहीथाआफ़्ताब-ए-उम्र
मुझकोमिरेज़वालपेहैरतनहींहुई
वोशख़्सइसजहानकाथाहीनहींकभी
'साहिर'केइंतिक़ालपेहैरतनहींहुई
  - Parvez Sahir
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