ham par nigaah-e-lutf k | हम पर निगाह-ए-लुत्फ़ कभी है कभी नहीं

  - Pandit Vidya Rattan Asi
हमपरनिगाह-ए-लुत्फ़कभीहैकभीनहीं
तुमहीकहोयेक्याहैअगरदिललगीनहीं
गोजीरहाहैआजभीकोईतिरेबग़ैर
लेकिनयेज़िंदगीतोकोईज़िंदगीनहीं
उसकीबलासेकोईजिएयाकोईमिरे
जिसकोकिसीकेदर्दकाएहसासहीनहीं
दिलमेंआरज़ूहैकोईअबवलवला
इकशम्अ'जलरहीहैमगररौशनीनहीं
आख़िरहमउनकेवा'दोंपरईमानलाएँक्या
जोहमपेमेहरबानअभीहैअभीनहीं
इसगुफ़्तुगूकीतर्ज़मेंतरमीमकीजिए
कबतकमैंख़ामोशीसेसुनूँआपकीनहीं
'आसी'ज़बान-ए-ख़ामुशीमेंदास्तान-ए-शौक़
हमनेकहीहैबारहाउसनेसुनीनहीं
  - Pandit Vidya Rattan Asi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy