yahii tamanna-e-dil hai un ki jidhar ko rukh ho udhar ko chaliye | यही तमन्ना-ए-दिल है उन की जिधर को रुख़ हो उधर को चलिए

  - Pandit Jawahar Nath Saqi
यहीतमन्ना-ए-दिलहैउनकीजिधरकोरुख़होउधरकोचलिए
हुआहैगोइश्तियाक़बेहदजमाकेपा-ए-नज़रकोचलिए
हुएहैंमहरूम-ए-दीद-ए-बे-दिलकियातजाहुलकाउसनेबिस्मिल
वोदिल-रुबाबनगयाहैक़ातिलकमरकोकसकेसफ़रकोचलिए
ग़रज़थीइज़हार-ए-मुद्दआसेसितमकोकियाहोगएजोशाकी
वोदेखतेहीबिगड़जाएँबुलानेअबनामा-बरकोचलिए
बनाहैदम-साज़कौनउनकापतानहींमुद्दतोंसेलगता
येराज़होजाएआश्काराकहींसेलेनेख़बरकोचलिए
अगरहैशौक़-ए-जमाल-ए-जानाँनहींहैकुछपास-ए-वज़्अ'-ए-मौज़ूँ
शिकोह-ए-तमकींविदाअ'कीजेमनानेउसइश्वा-गरकोचलिए
शहीदहै'साक़ी'-ए-दुआ-गोकशीदाक्यूँँइसक़दरहुएहो
कभीतोयारदेखनेकोज़राक़तील-ए-नज़रकोचलिए
  - Pandit Jawahar Nath Saqi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy