jo bashar har vaqt mahv-e-zaat hai | जो बशर हर वक़्त महव-ए-ज़ात है

  - Pandit Jawahar Nath Saqi
जोबशरहरवक़्तमहव-ए-ज़ातहै
क़ल्बउसकालम-यज़लमिरआतहै
जिसकोशग़्ल-ए-नफ़ी-ओ-इस्बातहै
वोहीसाहिब-दिलहैख़ुश-औक़ातहै
सहवहोताहैकभीहोताहैमहव
क्यामज़ेकाअपनायेदिन-रातहै
ना-मुराद-ए-दहरफ़र्द-ए-दहरहै
वोजहाँमेंक़ाज़ी-उल-हाजातहै
होंसिफ़ात-ए-नफ़्सजिसकेक़ल्ब-ए-रूह
वोबशरकबहैवोहुस्न-ए-ज़ातहै
साहब-ए-निस्बतकारुत्बाहैबुलंद
गरचेज़ाहिदसाहबुद्दा'वातहै
बस्तमेंजबक़ब्ज़कादौराहुआ
हैक़यामतनज़्अ'कीसकरातहै
वोतअय्युनहीकेफंदेमेंरहा
जोयहाँपाबंद-ए-महसूसातहै
मुग़्बचोहोजाओतुमभीबे-नियाज़
पीर-ए-मुग़तोक़िबला-ए-हाजातहै
हमभीहैं'साक़ी'तलाश-ए-यारमें
वोजोमिलजाएतोफिरक्याबातहै
  - Pandit Jawahar Nath Saqi
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