hasrat-o-ummeed ka maatam raha | हसरत-ओ-उम्मीद का मातम रहा

  - Pandit Jawahar Nath Saqi
हसरत-ओ-उम्मीदकामातमरहा
येवोदिलहैजोसदापुर-ग़मरहा
इकइकमुझपरसदाआलमरहा
मैंकभीबे-जाँकभीबे-दमरहा
मेरीक़िस्मतकीकजीकाअक्सहै
येजोबरहमगेसू-ए-पुर-ख़मरहा
वोदिल-ए-ग़म-गींहैमेराग़म-पसंद
ग़मकेजानेकाभीजिसकोग़मरहा
दिलकोहर-दमइकपरेशानीरही
ज़ुल्फ़-ए-जानाँकीतरहबरहमरहा
वोनमक-अफ़्शानियाँक़ातिलनेकीं
ज़ख़्म-ए-दिलशर्मिंदा-ए-मरहमरहा
बढ़तेबढ़तेहोगयानासूरदिल
ख़ूनकाक़तराजोदिलमेंजमरहा
थाफ़क़तइकग़ममदार-ए-ज़िंदगी
ग़मरहादिलमेंतोवोभीकमरहा
गिर्या-ओ-ज़ारीयही'साक़ी'रही
दिलकीहसरतकासदामातमरहा
  - Pandit Jawahar Nath Saqi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy