wafa-shia'ar ko tu ne zaleel-o-khwaar kiya | वफ़ा-शिआ'र को तू ने ज़लील-ओ-ख़्वार किया

  - Pandit Jagmohan Nath Raina Shauq
वफ़ा-शिआ'रकोतूनेज़लील-ओ-ख़्वारकिया
जफ़ा-परस्तयेक्याशेवाइख़्तियारकिया
उठाएसेउठादिलकापर्दा-ए-ग़फ़लत
ख़ताहुईकिउनआँखोंपेए'तिबारकिया
निगाह-ए-मस्त-ए-हक़ीक़ततोदेचुकीथीजवाब
मगरयेदिलहीथाफिरउसनेहोशियारकिया
वोतड़परहीदिलमेंवोरहीसोज़िश
इलाजक्याथायेक्यातूनेग़म-गुसारकिया
दिखाकेजल्वा-ए-बातिलकीइकझलकहुस्न
ख़ुदाकेबंदाकोनाहक़गुनाहगारकिया
किसीकेबसकादिल-ए-मुज़्तरिबथालेकिन
हमींनेख़ूगर-ए-अंदोह-ए-इंतिज़ारकिया
ख़याल-ए-इश्क़नेरहमतसेभीरखामहरूम
येक्याकियाकिगुनाहोंपेए'तिबारकिया
कहेमेंकेदिल-ए-ना-सुबूरकेहमने
तमामशबतिरेआनेकाइंतिज़ारकिया
तुम्हेंतोख़ाकमेंमिलनाथामिलगएआख़िर
जहाँमेंशौक़अबसउनकोशर्मसारकिया
  - Pandit Jagmohan Nath Raina Shauq
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