andhi raahon ki uljhan men bechaari ghabraai raat | अंधी राहों की उलझन में बेचारी घबराई रात

  - Paigham Aafaqi
अंधीराहोंकीउलझनमेंबेचारीघबराईरात
पहलेलहूमेंफिरआँसूमेंफिरकिरनोंमेंनहाईरात
इकपर्देकोउठजानाथाइकचेहरेकोआनाथा
कितनीहसींथीकितनीदिलकशशर्माईशर्माईरात
हरशाख़-ए-गुलमेंथीयेनर्मीग़ुंचेतकगिरजातेथे
आजहरइकटहनीपत्थरहैकैसीआँधीलाईरात
एककरिश्माइकधोकाथाएकतहय्युर-साज़ीथी
लेकिनइकआलमनेयेसमझाकिदिनसेटकराईरात
एकनयादरएकनयाघरएकनयाहंगामाहै
एकनएरहज़नकेघरइकनयामुसाफ़िरलाईरात
  - Paigham Aafaqi
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