maani lafzon ke peeri men kuchh shabaab men kuchh | मआनी लफ़्ज़ों के पीरी में कुछ शबाब में कुछ

  - Om Krishn Rahat
मआनीलफ़्ज़ोंकेपीरीमेंकुछशबाबमेंकुछ
औरउसकेबारेमेंलिक्खानहींकिताबमेंकुछ
पहुँचकेदेखातोमाँगेकीरौशनीकेसिवा
फ़लककेतारोंमेंकुछहैमाहताबमेंकुछ
हरएकघूँटमेंयकसाँनहींथीतल्ख़ी-ए-मय
किघोलदेतेहैंहालातभीशराबमेंकुछ
कईगुनाहोंकाइंदिराजहीनहींमिलता
किसीसेभूलहुईहैमिरेहिसाबमेंकुछ
हैतेराअक्सकिमेरेग़मोंकासायाहै
नज़रतोआताहैपैमाना-ए-शराबमेंकुछ
  - Om Krishn Rahat
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