har ek dar pe sar ko tapkane ke baawajood | हर एक दर पे सर को टपकने के बावजूद

  - Om Krishn Rahat
हरएकदरपेसरकोटपकनेकेबावजूद
का'बेपहुँचगयाहूँभटकनेकेबावजूद
क्याकीजिएकिगर्दतलबकीजमीरही
दामान-ए-दिलकोरोज़झटकनेकेबावजूद
शायदखुलीहैआपकेआनेसेचाँदनी
धुँदलीसीलगरहीथीछिटकनेकेबावजूद
कैसाहैयेबहारकामौसमकिबाग़में
हँसतीनहींहैंकलियाँचटकनेकेबावजूद
हमभीकिताब-ए-ज़ीस्तकोपढ़तेचलेगए
एकएकहर्फ़-ए-ग़मपेअटकनेकेबावजूद
अबकेजुनूँमेंआलम-ए-शोरीदगीपूछ
क़ाएमरहाहैसरकोपटकनेकेबावजूद
राहतगुज़ारदीहैबड़ीशानसेहयात
आँखोंमेंज़िंदगीकीखटकनेकेबावजूद
  - Om Krishn Rahat
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