daar-e-hashr zaraa aur badhe baat ki bas | दावर-ए-हश्र ज़रा और बढ़े बात कि बस

  - Om Krishn Rahat
दावर-ए-हश्रज़राऔरबढ़ेबातकिबस
मुझसेकुछऔरभीपूछेंगेसवालातकिबस
जिसकोसुनकरकभीख़ुशहोतेहोनाराज़कभी
आपफ़रमाएँकिदोहराऊँवहीबातकिबस
क्यामैंअबछोड़दूँयारबयहींउम्मीदकासाथ
क्याअभीऔरठहरसकतीहैयेरातकिबस
ज़िंदगीक्याइसीउलझनमेंगुज़रजाएगी
क्याअभीऔरभीबिगड़ेंगेयेहालातकिबस
येक़यामतकीघड़ीसरसेटलेगीयारब
हैंदिखानेकोअभीऔरकमालातकिबस
  - Om Krishn Rahat
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy