tujh but ka hooñ main brahman kartaar ki saugand hai | तुझ बुत का हूँ मैं बरहमन कर्तार की सौगंद है

  - Obaidullah Khan Mubtala
तुझबुतकाहूँमैंबरहमनकर्तारकीसौगंदहै
जपताहूँमालायारकीज़ुन्नारकीसौगंदहै
बाँकाहुस्नसुनकरतिराख़ूबाँनेखायापेच-ओ-ताब
नुक-पलकतुझचेहरा-ए-बल-दारकीसौगंदहै
ख़ूबाँकीख़ूबीहैख़िज़ाँतेरीबहारआँगेसदा
आशिक़कूँगुलफ़ामतुझरुख़्सारकीसौगंदहै
रखताहूँतुझसूँचश्मयेदिलमह-ए-नूर-ए-नज़र
केख़बरइकरोज़मुझबीमारकीसौगंदहै
दरिया-ए-वहदतमेंतिरेगौहर-ए-यकता-ए-हुस्न
पायानहींसानीतिरासंसारकीसौगंदहै
बिनहारआएगुल-रुख़ाँतेरेगलेपड़नेकतीं
जीतातोबारेहुस्नकेमिज़मारकीसौगंदहै
शर्मिंदगीसूँजाछुपायाक़ुव्वतअपनीकानमें
सुनकरदुर-अफ़्सानीतिरीगुफ़्तारकीसौगंदहै
शमशीर-ए-अबरूबाँधकरआयासिपाहीनैनका
दोटोकदिलहैंआशिक़ाँतलवारकीसौगंदहै
सहन-ए-चमनमेंगुल-बदनतन-ज़ेबकींतुझजामाकूँ
नैनसुखहैतेरादेखनादीदारकीसौगंदहै
तुझहिज्रमेंदिलकीफ़ुग़ाँसूँआँखनईंलगतीकभी
कमख़्वाबहैमख़मलमिराशब-ए-तारकीसौगंदहै
उश्शाक़कूँरुख़्सतकियादेपाँख़िरदकायारने
रोताहैनिसदिन'मुबतला'घर-बारकीसौगंदहै
  - Obaidullah Khan Mubtala
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