khayal-o-khwaab hui hain mohabbatein kaisi | ख़याल-ओ-ख़्वाब हुई हैं मोहब्बतें कैसी

  - Obaidullah Aleem
ख़याल-ओ-ख़्वाबहुईहैंमोहब्बतेंकैसी
लहूमेंनाचरहीहैंयेवहशतेंकैसी
शबकोचाँदहीअच्छादिनकोमेहरअच्छा
येहमपेबीतरहीहैंक़यामतेंकैसी
वोसाथथातोख़ुदाभीथामेहरबाँक्याक्या
बिछड़गयातोहुईहैंअदावतेंकैसी
अज़ाबजिनकातबस्सुमसवाबजिनकीनिगाह
खिंचीहुईहैंपस-ए-जाँयेसूरतेंकैसी
हवाकेदोषपेरक्खेहुएचराग़हैंहम
जोबुझगएतोहवासेशिकायतेंकैसी
जोबे-ख़बरकोईगुज़रातोयेसदादेदी
मैंसंग-ए-राहहूँमुझपरइनायतेंकैसी
नहींकिहुस्नहीनैरंगियोंमेंताक़नहीं
जुनूँभीखेलरहाहैसियासतेंकैसी
साहबान-ए-जुनूँहैंअहल-ए-कश्फ़-ओ-कमाल
हमारेअहदमेंआईंकसाफ़तेंकैसी
जोअब्रहैवहीअबसंग-ओ-ख़िश्तलाताहै
फ़ज़ायेहोतोदिलोंमेंनज़ाकतेंकैसी
येदौर-ए-बे-हुनराँहैबचारखोख़ुदको
यहाँसदाक़तेंकैसीकरामातेंकैसी
  - Obaidullah Aleem
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