ajeeb thii vo ajab tarah chahta tha main | अजीब थी वो अजब तरह चाहता था मैं

  - Obaidullah Aleem
अजीबथीवोअजबतरहचाहताथामैं
वोबातकरतीथीऔरख़्वाबदेखताथामैं
विसालकाहोकिउसकेफ़िराक़कामौसम
वोलज़्ज़तेंथींकिअंदरसेटूटताथामैं
चढ़ाहुआथावोनश्शाकिकमहोताथा
हज़ारबारउभरताथाडूबताथामैं
बदनकाखेलथींउसकीमोहब्बतेंलेकिन
जोभेदजिस्मकेथेजाँसेखोलताथामैं
फिरइसतरहकभीसोयाइसतरहजागा
किरूहनींदमेंथीऔरजागताथामैं
कहाँशिकस्तहुईऔरकहाँसिलापाया
किसीकाइश्क़किसीसेनिबाहताथामैं
मैंअहल-ए-ज़रकेमुक़ाबिलमेंथाफ़क़तशाएर
मगरमैंजीतगयालफ़्ज़हारताथामैं
  - Obaidullah Aleem
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