ab tu ho kisi rang men zaahir to mujhe kya | अब तू हो किसी रंग में ज़ाहिर तो मुझे क्या

  - Obaidullah Aleem
अबतूहोकिसीरंगमेंज़ाहिरतोमुझेक्या
ठहरेतिरेघरकोईमुसाफ़िरतोमुझेक्या
वीराना-ए-जाँकीजोफ़ज़ाथीसोरहेगी
चहकेकिसीगुलशनमेंवोताइरतोमुझेक्या
वोशम्अमिरेघरमेंतोबे-नूरहीठहरी
बाज़ारमेंवोजिंसहोनादिरतोमुझेक्या
वोरंग-फ़िशाँआँखवोतस्वीर-नुमाहाथ
दिखलाएँनएरोज़मनाज़िरतोमुझेक्या
मैंनेउसेचाहाथातोचाहागयामैं
चाहेमुझेअबवोमिरीख़ातिरतोमुझेक्या
दुनियानेतोजानाकिनुमूउसमेंहैमेरी
अबहोवोमिरीज़ातकामुनकिरतोमुझेक्या
इकख़्वाबथाऔरबुझगयाआँखोंहीमेंअपनी
अबकोईपुकारेमिरेशाइरतोमुझेक्या
  - Obaidullah Aleem
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