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NISHKARSH AGGARWAL
jab pareshaan hota hooñ is zindagi ki dhoop se
jab pareshaan hota hooñ is zindagi ki dhoop se | जब परेशाँ होता हूँ इस ज़िंदगी की धूप से
- NISHKARSH AGGARWAL
जब
परेशाँ
होता
हूँ
इस
ज़िंदगी
की
धूप
से
करता
हूँ
साया
किताबों
का
मैं
बच्चों
की
तरह
- NISHKARSH AGGARWAL
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ज़िंदगी
एक
कहानी
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
लोग
किरदार
निभाते
हुए
मर
जाते
हैं
Malikzada Javed
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मौत
का
भी
इलाज
हो
शायद
ज़िंदगी
का
कोई
इलाज
नहीं
Firaq Gorakhpuri
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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बहुत
हसीन
सही
सोहबतें
गुलों
की
मगर
वो
ज़िंदगी
है
जो
काँटों
के
दरमियाँ
गुज़रे
Jigar Moradabadi
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मौत
ही
इंसान
की
दुश्मन
नहीं
ज़िंदगी
भी
जान
ले
कर
जाएगी
Arsh Malsiyani
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न
लौटोगे
कभी
तुम
जानता
हूँ
ये
मेरी
ज़िंदगी
है
फ़िल्म
थोड़ी
SWAPNIL YADAV 'NIL'
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तुम्हारी
ज़िंदगी
में
तुम
हमेशा
मुझे
हर
आदमी
में
सुन
सकोगी
सुनोगी
जब
कभी
भी
शे'र
मेरे
तो
ख़ुद
को
शा'इरी
में
सुन
सकोगी
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Sanskar 'Sanam'
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ज़िंदगी
एक
फ़न
है
लम्हों
को
अपने
अंदाज़
से
गँवाने
का
Jaun Elia
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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ये
ज़मीं
किस
क़दर
सजाई
गई
ज़िंदगी
की
तड़प
बढ़ाई
गई
आईने
से
बिगड़
के
बैठ
गए
जिन
की
सूरत
जिन्हें
दिखाई
गई
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Sahir Ludhianvi
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पहले
रोते
थे
तो
सो
जाते
थे
अब
जो
रोते
हैं
तो
बस
रोते
हैं
NISHKARSH AGGARWAL
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ये
किस
लिए
चराग़ों
को
तुम
जला
रहे
हो
अंधों
को
रोशनी
की
क्या
सच
में
है
ज़रूरत?
NISHKARSH AGGARWAL
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तेरी
इन
यादों
की
धीमी
आँच
पे
रोज़
जलता
है
सनम
ये
दिल
मेरा
NISHKARSH AGGARWAL
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इतना
उदास
भी
न
करो
मुझको
दोस्तों
मेरे
दुखों
को
तुम
भी
कभी
समझो
दोस्तों
गर
कोई
बेसुरा
भी
सुरीला
लगे
तुम्हें
उस
सेे
तुम्हें
है
प्यार
ज़रा
समझो
दोस्तों
जब
रो
रहा
था
मैं
,पड़ी
तब
उसकी
रोशनी
इंद्रधनुष
बना
गया
वो
दिल
को
दोस्तों
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NISHKARSH AGGARWAL
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मारा
है
ग़म
ने
इस
क़दर
रोए
ख़ुशी
ये
देख
कर
दिल
धड़के
है
जोरों
से
क्यूँँ
जब
देखें
वो
यूँं
इक
नज़र
ढूढों
किधर
वो
है
गया
आँगन
में
था
जो
इक
शजर
देखा
तो
इन
आँखों
ने
था
फिर
क्यूँँ
हुआ
दिल
पे
असर?
सब
कुछ
गुज़र
जाता
है
तो
माज़ी
मिरे
तू
भी
गुज़र
खोया
रहा
मैं
इस
कदर
ढूंढें
मुझे
मेरा
ही
घर
मंजिल
सभी
की
मौत
है
है
ज़िन्दगी
बस
इक
सफ़र
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NISHKARSH AGGARWAL
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