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NISHKARSH AGGARWAL
maara hai gham ne is qadar
maara hai gham ne is qadar | मारा है ग़म ने इस क़दर
- NISHKARSH AGGARWAL
मारा
है
ग़म
ने
इस
क़दर
रोए
ख़ुशी
ये
देख
कर
दिल
धड़के
है
जोरों
से
क्यूँँ
जब
देखें
वो
यूँं
इक
नज़र
ढूढों
किधर
वो
है
गया
आँगन
में
था
जो
इक
शजर
देखा
तो
इन
आँखों
ने
था
फिर
क्यूँँ
हुआ
दिल
पे
असर?
सब
कुछ
गुज़र
जाता
है
तो
माज़ी
मिरे
तू
भी
गुज़र
खोया
रहा
मैं
इस
कदर
ढूंढें
मुझे
मेरा
ही
घर
मंजिल
सभी
की
मौत
है
है
ज़िन्दगी
बस
इक
सफ़र
- NISHKARSH AGGARWAL
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अच्छे
हो
कर
लौट
गए
सब
घर
लेकिन
मौत
का
चेहरा
याद
रहा
बीमारों
को
Shariq Kaifi
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हादसे
ने
किया
जुदा
हमको
मौत
ने
देर
कर
दी
आने
में
Kaif Uddin Khan
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यहाँ
मौत
का
ख़ौफ़
कुछ
यूँँ
है
सबको
कि
जीने
की
ख़ातिर
मरे
जा
रहे
हैं
Sapna Moolchandani
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जो
साँसों
को
गिनते
गिनते
जीता
है
उसकी
मौत
ज़रा
जल्दी
आ
जाती
है
Tanoj Dadhich
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मौत
का
एक
दिन
मुअय्यन
है
नींद
क्यूँँ
रात
भर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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तुम्हारी
मौत
मेरी
ज़िंदगी
से
बेहतर
है
तुम
एक
बार
मरे
मैं
तो
बार
बार
मरा
Zubair Ali Tabish
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ये
भी
अच्छा
हुआ
मौत
ने
आकर
हमको
बचा
लिया
वरना
हालत
ऐसी
थी,
हम
शायर
भी
हो
सकते
थे
Bhaskar Shukla
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दो
गज़
सही
मगर
ये
मेरी
मिल्कियत
तो
है
ऐ
मौत
तूने
मुझे
ज़मींदार
कर
दिया
Rahat Indori
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जन्नत
में
आ
गया
था
किसी
अप्सरा
पे
दिल
जिसकी
सज़ा-ए-मौत
में
दुनिया
मिली
मुझे
Ankit Maurya
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ज़िन्दगी
इक
हादसा
है
और
कैसा
हादसा
मौत
से
भी
ख़त्म
जिसका
सिलसिला
होता
नहीं
Jigar Moradabadi
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सुना
है
रात
दिन
रोते
हो
हैरत
है
अभी
तक
तुम
नहीं
बदले
हो
हैरत
है
कभी
माँ
को
ख़ुदा
समझा
नहीं
तुमने
सनम
को
तुम
ख़ुदा
कहते
हो
हैरत
है
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कैसे
मैं
आ
जाऊँ
ऐ
यार
तेरी
सोहबत
में
मैं
ग़ुलाम
बन
के
बैठा
हूँ
इस
मोहब्बत
में
NISHKARSH AGGARWAL
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कोई
मुझ
सेे
भी
पूछे
कैसा
हूँ
मैं
भी
तो
इस
दुनिया
में
रहता
हूँ
पहले
रोता
था
तो
सो
जाता
था
अब
जो
रोता
हूँ
तो
बस
रोता
हूँ
मैंने
भी
तोड़ा
है
ये
दिल
अपना
यारों
अब
मैं
भी
उसके
जैसा
हूँ
वो
भी
आएगा
मरने
पे
मेरे
मैं
तो
ये
सुन
कर
ही
मर
जाता
हूँ
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ऊँचाइयों
से
गिरना
अमाँ
जानता
हूँ
मैं
इन
पंछियों
को
तीर
नहीं
मारता
हूँ
मैं
मैं
सोचते
हुए
ये
कईं
बार
सोचता
के
सोचते
हुए
भी
तुम्हें
सोचता
हूँ
मैं
दिल
तेरा
तोड़ना
था
प
मैं
तोड़
ना
सका
बागों
के
फूल
क्यूँँंकि
नहीं
तोड़ता
हूँ
मैं
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इन
दीवारों
की
भी
आँखें
आ
जाती
हैं
मेरे
पहलू
से
जब
यादें
आ
जाती
हैं
सँभलने
लगता
हूँ
जब
भी
मैं
यारों
तब
दिन
को
धमका
के
ये
रातें
आ
जाती
हैं
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