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NISHKARSH AGGARWAL
koi mujhse bhi pooche kaisa hooñ
koi mujhse bhi pooche kaisa hooñ | कोई मुझ सेे भी पूछे कैसा हूँ
- NISHKARSH AGGARWAL
कोई
मुझ
सेे
भी
पूछे
कैसा
हूँ
मैं
भी
तो
इस
दुनिया
में
रहता
हूँ
पहले
रोता
था
तो
सो
जाता
था
अब
जो
रोता
हूँ
तो
बस
रोता
हूँ
मैंने
भी
तोड़ा
है
ये
दिल
अपना
यारों
अब
मैं
भी
उसके
जैसा
हूँ
वो
भी
आएगा
मरने
पे
मेरे
मैं
तो
ये
सुन
कर
ही
मर
जाता
हूँ
- NISHKARSH AGGARWAL
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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देखिए
होगा
श्री-कृष्ण
का
दर्शन
क्यूँँ-कर
सीना-ए-तंग
में
दिल
गोपियों
का
है
बेकल
Mohsin Kakorvi
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काम
अब
कोई
न
आएगा
बस
इक
दिल
के
सिवा
रास्ते
बंद
हैं
सब
कूचा-ए-क़ातिल
के
सिवा
Ali Sardar Jafri
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दोस्त
ने
दिल
को
तोड़
के
नक़्श-ए-वफ़ा
मिटा
दिया
समझे
थे
हम
जिसे
ख़लील
काबा
उसी
ने
ढा
दिया
Arzoo Lakhnavi
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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मारा
है
ग़म
ने
इस
क़दर
रोए
ख़ुशी
ये
देख
कर
दिल
धड़के
है
जोरों
से
क्यूँँ
जब
देखें
वो
यूँं
इक
नज़र
ढूढों
किधर
वो
है
गया
आँगन
में
था
जो
इक
शजर
देखा
तो
इन
आँखों
ने
था
फिर
क्यूँँ
हुआ
दिल
पे
असर?
सब
कुछ
गुज़र
जाता
है
तो
माज़ी
मिरे
तू
भी
गुज़र
खोया
रहा
मैं
इस
कदर
ढूंढें
मुझे
मेरा
ही
घर
मंजिल
सभी
की
मौत
है
है
ज़िन्दगी
बस
इक
सफ़र
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NISHKARSH AGGARWAL
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कैसे
मैं
आ
जाऊँ
ऐ
यार
तेरी
सोहबत
में
मैं
ग़ुलाम
बन
के
बैठा
हूँ
इस
मोहब्बत
में
NISHKARSH AGGARWAL
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मैंने
ख़ुद
को
बना
लिया
बेहतर
काश
तुम
मुझको
अब
मिली
होती
NISHKARSH AGGARWAL
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उसे
तो
देख
के
जीने
का
मन
करे
दोस्त
वो
कैसे
लोग
हैं
जो
उसको
देख
मरते
हैं
NISHKARSH AGGARWAL
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वो
कह
रहें
हैं
सब
सहीं
है
देख
तो
मैं
कह
रहा
हूँ
देख
मुझ
को
छोड़
कर
NISHKARSH AGGARWAL
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