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Nilesh Barai
ise taqseer samjho ya mirii qismat
ise taqseer samjho ya mirii qismat | इसे तक़्सीर समझो या मिरी क़िस्मत
- Nilesh Barai
इसे
तक़्सीर
समझो
या
मिरी
क़िस्मत
मैं
हर
दिन
एक
क़ातिल
खोज
लेता
हूँ।
- Nilesh Barai
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किसी
को
साल-ए-नौ
की
क्या
मुबारकबाद
दी
जाए
कैलन्डर
के
बदलने
से
मुक़द्दर
कब
बदलता
है
Aitbar Sajid
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मोहब्बत
अपनी
क़िस्मत
में
नहीं
है
इबादत
से
गुज़ारा
कर
रहे
है
Fahmi Badayuni
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
ना
थे
तुम
अगर
फूल
ना
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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कुछ
एक
की
हम
जैसी
क़िस्मत
होती
है
बाकी
सब
की
अच्छी
क़िस्मत
होती
है
Bhaskar Shukla
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काश
तू
सब
याद
रखती
और
मैं
सब
भूल
जाता
हाँ
मगर
ऐसा
न
होना
भी
तो
क़िस्मत
थी
हमारी
shaan manral
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परिंद
पेड़
से
परवाज़
करते
जाते
हैं
कि
बस्तियों
का
मुक़द्दर
बदलता
जाता
है
Asad Badayuni
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
न
थे
तुम
अगर
फूल
न
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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किसी
किसी
को
नसीब
हैं
ये
उदासियाँ
भी
किसी
को
ये
भी
बता
न
पाए
उदास
लड़के
Vikas Sahaj
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मुझे
भी
अपनी
क़िस्मत
पर
हमेशा
नाज़
रहता
है
सुना
है
ख़्वाहिशें
उनकी
भी
शर्मिंदा
नहीं
रहती
सुना
है
वो
भी
अब
तक
खाए
बैठी
हैं
कई
शौहर
बहुत
दिन
तक
मेरी
भी
बीवियाँ
ज़िंदा
नहीं
रहती
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Paplu Lucknawi
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और
इक
इंतिज़ार
हिस्से
में
कोई
आसान
काम
दे
मुझको
Nilesh Barai
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ग़मों
में
जी
रहे
है
रिंद
सारे
खता
मत
पूछ
याँ
सागर
गिरा
है
Nilesh Barai
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दो
दिन
चलता
है
बाबू
शोना
जानू
बाद
में
आना-कानी
होने
लगती
है
Nilesh Barai
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मेरी
मौत
पर
ये
शोर
ये
सवाल
आज
क्यूँ
आज
एक
अर्सा
हो
गया
मरे
हुए
मुझे
Nilesh Barai
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आज
नहीं
तो
कल
तुझ
सेे
भी
निकलेगा
तूने
गर
मेरी
आँखों
में
बोया
आँसू
ओ
नादाँ
इस
में
आया
तो
डूबेगा
मेरी
आँख
से
टपका
है
उसका
आँसू
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Nilesh Barai
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