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Naved sahil
guzarte saal se ye poochna tha
guzarte saal se ye poochna tha | गुज़रते साल से ये पूछना था
- Naved sahil
गुज़रते
साल
से
ये
पूछना
था
वो
ख़ुश
तो
है
हमें
बर्बाद
कर
के
- Naved sahil
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दुखी
रहने
की
आदत
यूँंँ
बना
ली
है
कि
अब
कोई
ख़ुशी
का
ज़िक्र
भी
कर
दे
तो
फिर
तकलीफ़
होती
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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ज़मीं
पे
घर
बनाया
है
मगर
जन्नत
में
रहते
हैं
हमारी
ख़ुश-नसीबी
है
कि
हम
भारत
में
रहते
हैं
Mehshar Afridi
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Shadan Ahsan Marehrvi
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इतने
अफ़सुर्दा
नहीं
हैं
हम
कि
कर
लें
ख़ुद-कुशी
और
न
इतने
ख़ुश
कि
सच
में
मरने
की
ख़्वाहिश
न
हो
Charagh Sharma
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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क्या
तकल्लुफ़
करें
ये
कहने
में
जो
भी
ख़ुश
है
हम
उस
से
जलते
हैं
Jaun Elia
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जो
बिस्मिल
बना
दे
वो
क़ातिल
तबस्सुम
जो
क़ातिल
बना
दे
वो
दिलकश
नज़ारा
मोहब्बत
का
भी
खेल
नाज़ुक
है
कितना
नज़र
मिल
गई
आप
जीते
मैं
हारा
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Nushur Wahidi
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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तुम
इन
लबों
की
हँसी
और
ख़ुशी
पे
मत
जाना
ये
रोज़
रोज़
हमें
भी
फ़रेब
देते
हैं
Shadab Asghar
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वो
बे-वफ़ा
है
तो
क्या
मत
कहो
बुरा
उसको
कि
जो
हुआ
सो
हुआ
ख़ुश
रखे
ख़ुदा
उसको
Naseer Turabi
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मिलना
था
जिसको
प्यार
वो
लड़का
नहीं
था
मैं
इतनी
सी
बात
थी
जिसे
समझा
नहीं
था
मैं
शबनम
बता
रही
है
कि
रोया
है
आसमाँ
कल
रात
रोने
वालों
में
तन्हा
नहीं
था
मैं
ये
कैसे
सोच
सकते
हो
लाऊॅंगा
बीच
से
वक़्फ़ा
लिया
था
राह
से
भटका
नहीं
था
मैं
जाने
से
तेरे
मेरी
ग़लतफ़हमी
तो
मिटी
दुनिया
में
तेरे
था
तेरी
दुनिया
नहीं
था
मैं
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Naved sahil
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ख़ुदास
बोल
देना
याद
कर
के
वो
बूढ़ा
मर
गया
फ़रियाद
कर
के
ये
पक्षी
और
कोई
बाँध
लेगा
इसे
क्या
फ़ाइदा
आज़ाद
कर
के
गुज़रते
साल
से
ये
पूछना
था
वो
ख़ुश
तो
है
हमें
बर्बाद
कर
के
ख़ुदा
कुछ
वक़्त
मेरी
मौत
टालो
मुझे
मरना
है
सबको
शाद
कर
के
ये
पिछला
साल
था
क़ातिल,
तो
डर
है
नया
मारे
न
फिर
बेदाद
कर
के
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Naved sahil
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फिर
से
कहता
हूँ
जान,
जाने
दो
दूर
रहता
हूँ
जान,
जाने
दो
रोक
ले
मुझको
और
बातें
कर
झूठ
कहता
हूँ
जान,
जाने
दो
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Naved sahil
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सज
सँवर
के
सामने
जो
तुम
हमारे
आ
गए
यूँँ
लगा
की
इस
ज़मीं
पे
सब
सितारे
आ
गए
कश्ती
मेरी
डूब
कर
भी
इक
नसीहत
दे
गई
उस
नसीहत
के
सहारे
हम
किनारे
आ
गए
नेट
की
दुनिया
में
हम
तो
शा'इरी
ले
आए
थे
वो
अजूबे
हो
गए
जो
तन
उघारे
आ
गए
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Naved sahil
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वक़्त
पे
यूँँ
न
आना,
ग़लत
बात
है
फिर
बहाने
से
जाना,
ग़लत
बात
है
आधी
रातों
में
हम
किसको
आवाज़
दें
नींद
से
यूँँ
जगाना,
ग़लत
बात
है
नफ़रतों
से
भरी
जैसी
दुनिया
है
ये
इस
में
उल्फ़त
निभाना,
ग़लत
बात
है
जिनका
घर
में
कोई
और
साथी
ना
हो
उसका
दीपक
बुझाना,
ग़लत
बात
है
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Naved sahil
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