ye jo subh ke beech deewaar-e-shab si uthi lagti hai | ये जो सुब्ह के बीच दीवार-ए-शब सी उठी लगती है

  - Naheed Virk
येजोसुब्हकेबीचदीवार-ए-शबसीउठीलगतीहै
हैअक्स-ए-तहय्युरकीयेदास्ताँऔरसुनीलगतीहै
जोमैंख़्वाहिशोंमेंघिरीचुपभरीसाअतेंतकतीहूँ
मुझेउनकेअंदरतलकतिरीख़्वाहिशगड़ीलगतीहै
तिराविर्दकरतीहुईआसमाँसेउतरतीहुई
कोईनूरजैसीदु'आचार-सूगूँजतीलगतीहै
मिरेआइनेमेंजोतस्वीरतेरीउभरआईहै
येझुटलानेसेफ़ाएदा?मुझकोयेरौशनीलगतीहै
फ़क़तमेरेचेहरेपेहीरंगखिलकेनहींउतरेहैं
शफ़क़शामकीमेरीआँखोंसेभीझाँकतीलगतीहै
  - Naheed Virk
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