bharii raat men jaagna pad gaya hai | भरी रात में जागना पड़ गया है

  - Naheed Virk
भरीरातमेंजागनापड़गयाहै
तिरेबारेमेंसोचनापड़गयाहै
किसीख़्वाबकीफिरसेदस्तकहैशायद
दर-ए-दिलमुझेखोलनापड़गयाहै
तिरीसोचभीसोचनीपड़गईहै
तिरालहजाभीबोलनापड़गयाहै
धुआँबनकेसाँसोंमेंचुभनेलगीथी
ख़मोशीकोअबतोड़नापड़गयाहै
जहाँरेज़ारेज़ामैंबिखरीपड़ीथी
वोमंज़रमुझेजोड़नापड़गयाहै
येक्यासरसराहटहुईमेरेदिलमें
क़लमरोककरसोचनापड़गयाहै
  - Naheed Virk
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy