na gul khile hain na gardish men jaam aaya hai | न गुल खिले हैं न गर्दिश में जाम आया है

  - Nafees Ahmad Sahar
गुलखिलेहैंगर्दिशमेंजामआयाहै
येकैसाअबकेचमनमेंनिज़ामआयाहै
अमलसेज़र्फ़सेईसारसेमोहब्बतसे
हमारादिलहीज़मानेकेकामआयाहै
अताहुआहैजिन्हेंअज़्मसरफ़रोशीका
उन्हींकोदार-ओ-रसनकासलामआयाहै
लिबास-ए-शर्म-ओ-हयानज़्र-ए-मस्लहतकरके
येकौनदेखनाबाला-ए-बामआयाहै
हमअपनेदर्दकोभीदर्दकहनहींसकते
कोईबताएयेकैसामक़ामआयाहै
तिलिस्मटूटगयाहै'सहर'जुदाईका
निगाह-ए-मस्तकाजबभीपयामआयाहै
  - Nafees Ahmad Sahar
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