zindagi apni kaamyaab nahin | ज़िंदगी अपनी कामयाब नहीं

  - Nadir Shahjahanpuri
ज़िंदगीअपनीकामयाबनहीं
ग़म-ए-दौराँकाकुछहिसाबनहीं
दर्दजिसमेंहोवोदिलकैसा
नाज़जिसमेंहोशबाबनहीं
मौज-ए-दरियाकोचाहिएतेज़ी
जोउठाएसरहबाबनहीं
दोस्ततेरीहरीम-ए-अक़्दसमें
एकबंदाहीबारयाबनहीं
ख़्वाब-ए-मर्गआएगाज़रूरइकदिन
येहक़ीक़तहैकोईख़्वाबनहीं
तेरेबाब-ए-क़ुबूलपरयारब
अर्ज़मेरीहीमुस्तजाबनहीं
कामयेलाजवाबकरतेहो
मेरेख़तकाकोईजवाबनहीं
मेरेजुर्मोंकाकुछहिसाबतोहै
तेरेहीरहमकाहिसाबनहीं
क्याकरूँँतेरीदीदकीहसरत
जबमुझेदेखनेकीताबनहीं
देखगहरीनज़रसेदरियाको
कोईऐसीखुलीकिताबनहीं
तुझसेबेकसहैंसैकड़ों'नादिर'
ज़ेर-ए-गर्दूंतूहीख़राबनहीं
  - Nadir Shahjahanpuri
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