ki.e qaraar magar be-qaraar hi rakha | किए क़रार मगर बे-क़रार ही रक्खा

  - Nadir Shahjahanpuri
किएक़रारमगरबे-क़रारहीरक्खा
हमेंतोआपनेउम्मीद-वारहीरक्खा
पस-ए-फ़नाभीफ़लकनेग़ुबारहीरक्खा
रक्खीख़ाकसंग-ए-मज़ारहीरक्खा
किसीकेदर्द-ए-जुदाईनेहमकोजीतेजी
मिसाल-ए-अब्र-ए-सियहअश्क-बारहीरक्खा
मैंतेग़-ए-यारकाक्यूँँकरदमभरूँजिसने
मज़ेख़लिशकेदिएदिल-फ़िगारहीरक्खा
मिलाचैनकभीहमकोख़ाकहोकरभी
फ़लकनेदोश-ए-सबापरसवारहीरक्खा
ख़याल-ए-आरिज़-ए-रंगींनेरोज़कर
ख़िज़ाँमेंभीहमेंमहव-ए-बहारहीरक्खा
किसीकीचश्म-ए-मुकयफ़नेकियाकहीं'नादिर'
तमामउम्रहमेंबादा-ख़्वारहीरक्खा
  - Nadir Shahjahanpuri
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