vasl ne jab mirii takhleeq ko zanjeer kya | वस्ल ने जब मिरी तख़्लीक़ को ज़ंजीर क्या

  - Nadeem Gullani
वस्लनेजबमिरीतख़्लीक़कोज़ंजीरक्या
हिज्रकहनेलगामैंसाथहूँतूलिखताजा
तुझसेमैंजंगकाएलानभीकरहीदूँगा
मेरेदुश्मनतूमिरेक़दकेबराबरतो
मुझसेनादाँकीकिताबेंसमझपाएहैं
तूसमझताहैयेसमझेंगेसहीफ़ेख़ुदा
डूबकरदर्दकेदरियामेंमेरेहमदम
तुझकोकैसेमैंबताऊँकिमैंनेक्यापाया
अश्कबाहरतोरवाँआँखसेहोताहैनदीम
सोचताहूँकियेअंदरमैंकहाँसेआया
  - Nadeem Gullani
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