tiri qurbaten hain sakoon jaan-e-jaanaan | तिरी क़ुर्बतें हैं सकूँ जान-ए-जानाँ

  - Nadeem Gullani
तिरीक़ुर्बतेंहैंसकूँजान-ए-जानाँ
वगर्नामोहब्बतजुनूँजान-ए-जानाँ
जोसोचूँमैंहालातअपनेवतनके
रगोंमेंसेरिसताहैख़ूँजान-ए-जानाँ
अभीतकघनेरीसीचादरमेंहूँमैं
किसीज़ुल्फ़काहैफ़ुसूँजान-ए-जानाँ
फ़सानेमोहब्बतकेज़िंदारहेंगे
मैंलिक्खूँचाहेलिखूँजान-ए-जानाँ
तुम्हारीमोहब्बतकाअबभीक़समसे
मिरेचारसूहैफ़ुसूँजान-ए-जानाँ
ख़रीदारतूहोतोख़्वाहिशहैमेरी
कियूसुफ़केतरहबिकूँजान-ए-जानाँ
ज़मानातोकहताहैकहतारहेगा
येयूँँहैयेयूँँहैयेयूँँजान-ए-जानाँ
  - Nadeem Gullani
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