apni uljhan ko badhaane ki zaroorat kya hai | अपनी उलझन को बढ़ाने की ज़रूरत क्या है

  - Nadeem Gullani
अपनीउलझनकोबढ़ानेकीज़रूरतक्याहै
छोड़नाहैतोबहानेकीज़रूरतक्याहै
लगचुकीआगतोलाज़िमहैधुआँउट्ठेगा
दर्दकोदिलमेंछुपानेकीज़रूरतक्याहै
उम्रभररहनाहैता'बीरसेगरदूरतुम्हें
फिरमिरेख़्वाबमेंआनेकीज़रूरतक्याहै
अजनबीरंगछलकताहोअगरआँखोंसे
उनसेफिरहाथमिलानेकीज़रूरतक्याहै
आजबैठेहैंतिरेपासकईदोस्तनए
अबतुझेदोस्तपुरानेकीज़रूरतक्याहै
साथरहतेहोमगरसाथनहींरहतेहो
ऐसेरिश्तेकोनिभानेकीज़रूरतक्याहै
  - Nadeem Gullani
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