yuñ khush-gumaan rakha gaya umar bhar mujhe | यूँँ ख़ुश-गुमान रक्खा गया उमर भर मुझे

  - Nadeem Fazli
यूँँख़ुश-गुमानरक्खागयाउमरभरमुझे
हरशामसेमलीहैनवेद-ए-सहरमुझे
मैंथाजोहद्द-ए-जिस्मसेआगेबढ़सका
वोलेगयाबदनसेमिरेछीनकरमुझे
मैंज़ाएअ'होचुकाहूँबहुतखेलखेलमें
वक़्तअबऔरलगादावपरमुझे
मेरेलिएक़ज़ाहैअभीदाइमीहयात
कुछलोगचाहतेहैंअभीटूटकरमुझे
होनाहैमो'तबरमुझेअपनीनिगाहमें
कबए'तिबारबख़्शेगीतेरीनज़रमुझे
मेरीतरह'नदीम'उसेहिचकियाँआएँ
जोसोचताहैरातकैपिछलेपहरमुझे
  - Nadeem Fazli
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