gham-o-khushi ke agar silsile nahin chalte | ग़म-ओ-ख़ुशी के अगर सिलसिले नहीं चलते

  - Nadeem Farrukh
ग़म-ओ-ख़ुशीकेअगरसिलसिलेनहींचलते
तोमेरेसाथकभीहौसलेनहींचलते
अनाकेपेड़पेखिलतेनहींख़ुलूसकेफूल
ज़िदोंकेसाथकभीफ़ैसलेनहींचलते
बसइकनिगाहपे'उम्रेंनिसारहोतीहैं
मोहब्बतोंकेकभीसिलसिलेनहींचलते
हमारेक़दमोंमेंरहतेहैंरास्तेलेकिन
हमारेसाथकभीमरहलेनहींचलते
हरएकशख़्सयहाँमीर-ए-कारवाँख़ुदहै
इसीलिएतोयहाँक़ाफ़िलेनहींचलते
  - Nadeem Farrukh
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