hamaari tarz-e-shikaayat kisi ko kya maaloom | हमारी तर्ज़-ए-शिकायत किसी को क्या मालूम

  - Nabiul Hasan Shamim
हमारीतर्ज़-ए-शिकायतकिसीकोक्यामालूम
तुम्हारारंग-ए-तबीअ'तकिसीकोक्यामालूम
हरएकख़ूनकेक़तरेमेंहैतिरीतस्वीर
येइंतिहा-ए-मोहब्बतकिसीकोक्यामालूम
हमारेअश्क-ए-नदामतपिरोएजाएँगे
बनेगादामन-ए-रहमतकिसीकोक्यामालूम
जोदिलभीदेतेहैंहमनामतकनहींलेते
हमारीशान-ए-मुरव्वतकिसीकोक्यामालूम
तजल्लियोंनेकियाइंतिख़ाब-ए-दिलमेरा
मुझेमिलीहैजोदौलतकिसीकोक्यामालूम
ख़ुदाकीयादमेंहरवक़्तमहवरहताहै
दिल-ए-'शमीम'कीहालतकिसीकोक्यामालूम
  - Nabiul Hasan Shamim
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