choor the log jo sangeeni-e-hijrat se yahaañ | चूर थे लोग जो संगीनी-ए-हिजरत से यहाँ

  - Nabeel Ahmad Nabeel
चूरथेलोगजोसंगीनी-ए-हिजरतसेयहाँ
साँसभीआतानहींउनकोसुहुलतसेयहाँ
वोकिसीफूलकिसीग़ुंचेकेहक़दारनहीं
दश्तगुलज़ारबनातेहैंजोमेहनतसेयहाँ
चोग़ापहनायागयाझूटकासच्चाईको
औरमआ'नीलिएनफ़रतकेमोहब्बतसेयहाँ
हमनेबुनियादरखीज़हर-बुझेसज्दोंकी
तेग़काकामलियाहमनेइबादतसेयहाँ
हाथहालातनेडालेहैंगरेबानोंमें
ज़िंदगीकैसेगुज़ारेकोईइज़्ज़तसेयहाँ
पेटपेबाँधागयासब्रकाभारीपत्थर
औरगुज़ारागयाहरलम्हामशक़्क़तसेयहाँ
साहब-ए-मिम्बर-ओ-मेहराबभीक्याभूकाहै
पेटकीआगबुझाताहैशरीअ'तसेयहाँ
साँसचुभतारहाकाँटेकीतरहदिलमें'नबील'
जिस्मढलतेरहेछालोंमेंअज़िय्यतसेयहाँ
  - Nabeel Ahmad Nabeel
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