aise vo daastaan kheenchta hai | ऐसे वो दास्तान खींचता है

  - Nabeel Ahmad Nabeel
ऐसेवोदास्तानखींचताहै
हरयक़ींपरगुमानखींचताहै
तेरीफ़ुर्क़तकाएकइकलम्हा
जिस्मसेमेरीजानखींचताहै
जबभीमैंआसमाँकोछूनेलगूँ
पाँवकोमेहरबानखींचताहै
मंज़िल-ए-ज़ीस्तकेकिसीभीतरफ़
अपनीजानिबनिशानखींचताहै
मैंहक़ीक़तजहाँभीलिखताहूँ
वोवहीदास्तानखींचताहै
जबहक़ीक़तबयाँकरूँँउसकी
मेरेमुँहसेज़बानखींचताहै
सर-ज़मीन-ए-वतनपेअबवो'नबील'
अपनाहरसूमकानखींचताहै
  - Nabeel Ahmad Nabeel
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