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Murari Mandal
zamaane bhar men phaili hai wafaadaari hamaari
zamaane bhar men phaili hai wafaadaari hamaari | ज़माने भर में फैली है वफादारी हमारी
- Murari Mandal
ज़माने
भर
में
फैली
है
वफादारी
हमारी
भला
कैसे
छिपेगी
जान
ये
यारी
हमारी
पता
चलता
है
हँसने
से
अधूरे
हम
बहुत
हैं
चलेगी
अब
नहीं
ज़्यादा
अदाकारी
हमारी
- Murari Mandal
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कमरे
में
सिगरेटों
का
धुआँ
और
तेरी
महक
जैसे
शदीद
धुँध
में
बाग़ों
की
सैर
हो
Umair Najmi
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इतनी
शोहरत
तो
मेरी
आज
भी
इस
शहर
में
है
एक
पत्ता
न
हिले
मेरी
इजाज़त
के
बग़ैर
Mukesh Jha
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इश्क़
हुआ
है
क्या
तुझ
को
भी
तेरा
जो
होगा
सो
होगा
shaan manral
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ग़ज़ल
पूरी
न
हो
चाहे,
मग़र
इतनी
सी
ख़्वाहिश
है
मुझे
इक
शे'र
कहना
है
तेरे
रुख़्सार
की
ख़ातिर
Siddharth Saaz
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तुम्हारी
राह
में
मिट्टी
के
घर
नहीं
आते
इसलिए
तो
तुम्हें
हम
नज़र
नहीं
आते
Waseem Barelvi
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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रहबर
भी
ये
हमदम
भी
ये
ग़म-ख़्वार
हमारे
उस्ताद
ये
क़ौमों
के
हैं
में'मार
हमारे
Unknown
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माँ-बाबा
का
सोच
के
हर
दम
रुक
जाता
हूँ
वरना
तो
इतने
ग़म
में
मैंने
पंखे
से
टंग
कर
मर
जाना
था
Shashwat Singh Darpan
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इतना
आसान
नहीं
होता
है
शायर
कहलाना
दर्दों
को
कहने
से
पहले
सहना
भी
पड़ता
है
Harsh saxena
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जिस
तरफ़
तू
है
उधर
होंगी
सभी
की
नज़रें
ईद
के
चाँद
का
दीदार
बहाना
ही
सही
Amjad Islam Amjad
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कोई
इक
शे'र
सुनके
रो
पड़ा
है
किसी
को
फ़र्क
नइ
पड़ता
ग़ज़ल
से
Murari Mandal
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कोई
जा
के
पता
करो
यारों
कौन
लिखता
है
भाग्य
लड़कों
का
Murari Mandal
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कर
लिया
था
इक
दफा
जो
आशिक़ी
तब
से
मुश्किल
में
है
यारों
ज़िंदगी
कहते
हैं
सब
चाहने
वाले
मेरे
लेके
डूबेगी
तुम्हें
ये
बेदिली
झूठ
कहते
हैं
ये
सब
के
साथ
हूँ
है
असल
में
साथ
में
बस
शा'इरी
बे-वफ़ा
का
बे
कहा
मैंने
फ़क़त
और
सबको
याद
तुम
आने
लगी
अब
ज़रूरत
है
नहीं
श्रृंगार
की
क्या
कयामत
ढा
रही
है
सादगी
सपने
और
तक़दीर
के
इस
खेल
में
एक
दिन
हारी
मिलेगी
ज़िंदगी
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Murari Mandal
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उसके
साथ
ये
हाथ
मिलाने
से
पहले
मर
ही
न
जाऊँ
जश्न
मनाने
से
पहले
वक़्त
बदलने
वाला
है
जल्दी
मेरा
सोच
लो
ये
भी
छोड़
के
जाने
से
पहले
क़ैद
से
मेरी
अब
क्यूँ
दिक़्क़त
है
तुमको
सोचना
था
ये
जाल
बिछाने
से
पहले
तुम
भी
किसी
के
बाप
बनोगे
याद
रखो
अपने
बाप
को
आँख
दिखाने
से
पहले
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Murari Mandal
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ग़मों
को
बस
ज़रा
सा
देखते
हैं
हुआ
है
जो
खु़लासा
देखते
हैं
कोई
है
जो
मुझे
मरहम
लगाए
मेरे
अपने
तमाशा
देखते
हैं
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Murari Mandal
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