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Murari Mandal
ghamon ko bas zaraa sa dekhte hain
ghamon ko bas zaraa sa dekhte hain | ग़मों को बस ज़रा सा देखते हैं
- Murari Mandal
ग़मों
को
बस
ज़रा
सा
देखते
हैं
हुआ
है
जो
खु़लासा
देखते
हैं
कोई
है
जो
मुझे
मरहम
लगाए
मेरे
अपने
तमाशा
देखते
हैं
- Murari Mandal
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दुखों
का
बोझ
ढोना
लाज़मी
है
अभी
बस
मौन
होना
लाज़मी
है
कोई
समझे
नहीं
तकलीफ़
को
जब
अकेले
छिप
के
रोना
लाज़मी
है
न
हम
में
कुछ
रहा
पहले
के
जैसा
हमारा
दूर
होना
लाज़मी
है
अभी
टूटा
है
दिल
ताज़ा
हमारा
अभी
ये
रोना
धोना
लाज़मी
है
तुम्हारा
इश्क़
पहला
है
ये
प्यारे
तुम्हारा
चैन
खोना
लाज़मी
है
अभी
शुरुआत
है
इस
ज़िंदगी
की
अभी
सपने
पिरोना
लाज़मी
है
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Murari Mandal
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समझ
सकता
नहीं
कोई
मिरी
हालत
को
'माधव'
जी
मैं
उसको
देख
सकता
हूँ
मगर
अब
छू
नहीं
सकता
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कोई
जा
के
पता
करो
यारों
कौन
लिखता
है
भाग्य
लड़कों
का
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कभी
तो
काम
आ
जाए
दु'आ
मेरी
खिले
गुल
एक
मेरे
भी
बगीचे
में
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इश्क़
की
बातों
को
मैं
बस
गुन
गुनाता
रह
गया
इक
बड़ाई
पर
मैं
उसके
और
गाता
रह
गया
कोई
आया
और
उसको
ब्याह
कर
भी
ले
गया
और
माधव
प्रेम
के
बस
गीत
गाता
रह
गया
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